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Saturday, 19 October 2019

नहीं रहे शहर के समाजसेवी शब्बीर अहमद खिलजी उर्फ भाईजान हजारों की भीड़ ने ...





जोधपुर ने खोया अपना कोहिनूर।

नहीं रहे शहर के समाजसेवी शब्बीर अहमद खिलजी उर्फ भाईजान

     हजारों की भीड़ ने नमाज ए जनाज़ा में शिर्कत कर, की मग़फिरत की दुआएं



     जोधपुर 18 अक्टूबर। छत्तीसी कौमों में भरोसे के प्रतीक व हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए मशहूर समाजसेवी, हमारें रहबर, हाजी शब्बीर अहमद खिलजी उर्फ भाईजान की गुरूवार देर रात को एक निजी अस्पताल में मृत्यु हो जाने से शहर मे ंग़म का माहौल छा गया। इनको शुक्रवार को पांचवी रोड़ के आईशा बाई कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक़ कर दिया गया।

          मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के पूर्व महासचिव मोहम्मद अतीक ने बताया कि मेरे बड़े भाई और मेरे खास दोस्त, हमारे भाईजान पिछले दिनों दिल की बीमारी से ग्रस्त हो गये थे और उनकी अहमदाबाद में आॅपन हार्ट सर्जरी हुई। परन्तु इनके स्वास्थ्य में निरन्तर गिरावट आती चली गई। कुछ दिनों पश्चात् जोधपुर शहर के एक बड़े निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अन्तिम सांस ली।

        उन्होंने कहा कि शब्बीर अहमद खिलजी की उम्र करीब 80 वर्ष रही। वे मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी (मुस्लिम स्कूल) के पूर्व अध्यक्ष व सचिव रहे। तकिया चांद शाह मैनेजमेन्ट, दारूल उलूम अहले हदीस, वक्फ आगा अल्मास मक्का (सऊदी अरब), कौम नागौरी तेलियान, नागौरी तेलियान मिडिल स्कूल, मारवाड़ सिन्धी पीपुल्स काॅन्फ्रेन्स के अध्यक्ष रहे। आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड, मर्कजी जमीयत अहले हदीस आॅल इण्डिया शूरा काउन्सिल, रहमतुललिलआलमिन ब्लड डोनेशन कैम्पेन, जोधपुर के सदस्य रहे तथा कई सामाजिक संस्थाओं में विभिन्न पदों पर रहते हुए वर्तमान में मारवाड़ शरिआ काॅ आॅपरेटिव क्रेडिट एण्ड सेविंग्स सोसायटी लिमिटेड जोधपुर के उपाध्यक्ष थे। वे एशियन बैरिंग फर्म जोधपुर के एक सफल उद्यमी भी रहे। इनके व्यापारिक रिश्ते न सिर्फ भारत बल्कि जर्मनी तक में थे। 

मरहूम (स्वर्गीय) शब्बीर अहमद खिलजी के मणीपुर गवर्नर नजमा हेपतुल्लाह, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व महाराजा गजसिंह सहित कई प्रतिष्ठित लोगों से इनके निजी सम्बन्ध भी रहे। इन्हें जोधपुर सहित राजस्थान के विभिन्न इलाकों में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लाइफ टाइम अचीवमेंन्ट अवार्ड से नवाज़ा गया तथा ये मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि के तौर पर भी कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी हुये। इनके तीन पुत्र व दो पुत्रिया सहित कई पौते, पौतिया, नाते व नातियां सहित भरा पूरा परिवार है।

मोहम्मद अतीक ने आगे जानकारी दी कि उनका इस जहां से जाना सिर्फ मारवाड़ की ही क्षति नहीं बल्कि राजस्थान प्रदेश के लिए मानवता के क्षेत्र में निःस्वार्थ काम करने वाले फरिश्ते के रूप में इनकी कमी हमेशा खलती रहेगी, जिसकी भरपाई शायद सदियों तक न हो सके।

      भाईजान को जोधपुर ही नहीं बल्कि सम्प्पूर्ण राजस्थान में सामाजिक कल्याणकारी कार्यो, जनप्रतिनिधी कार्य, विधवा, अनाथ व गरीबों के सहायतार्थ, अल्पसंख्यक शिक्षा के अलावा विशेष रूप से पति -पत्नी व रिश्तेदारियों में हुये झगड़ों की सुलह करवाने के मसीहा के रूप में हमेशा याद किया जायेगा। जोधपुर के मौलाना अबुल कलाम आज़ाद मुस्लिम सीनियर सैकेण्डरी स्कूल (मुस्लिम स्कूल) से मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी जोधपुर तक के विकास में उनका योगदान हमेशा सर्वणिम अक्षरों में लिखा जायेगा।                                                                                               

          इन्हें पूर्व राजस्थान वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शौकत अंसारी, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सईद अंसारी, बीजेपी के जिलाध्यक्ष जगत नारायण जोशी, बीजेपी नेता नईम सिलावट, मोहम्मद रफीक, कांग्रेस के पार्षद उमर चाौहान, आज़म जोधपुरी, लियाकत अली रंगेरेज, पूर्व आईएफएस इस्हाक अहमद मुगल, सर्वादेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा राजस्थान के कार्यवाहक प्रधान राम सिंह आर्य, मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद्मश्री अख्तरूल वासे, यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार पूर्व आरएएस अनवर अली खान, सोसायटी के सरपरस्त फजलुरर्हमान, डाॅ गुलाम रब्बानी, अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, महासचिव निसार अहमद खिलजी, उपाध्यक्ष मोहम्मद अली चुंदडीगर, कोषाध्यक्ष हाजी अताउर्रहमान कुरैशी, शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि, कई गणमाान्य लोगों सहित सभी सोसायटी सदस्य, समस्त शैक्षिक, कल्याणकारी संस्थाओं के स्टाॅफगण व सभी मित्रों सहित हजारों की भीड़ ने इनके नमाज ए जनाज़ा में शिर्कत कर, मग़फिरत की दुआएं व खिराज ए अकीदत पेश की।

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